अनभिज्ञ हूँ काल से सम्बन्धित सारर्गभित बातों से , शिराज़ा है अंतस भावों और अहसासों का, कुछ ख्यालों और कल्पनाओं से राब्ता बनाए रखती हूँ जिसे शब्दों द्वारा काव्य रुप में ढालने की कोशिश....
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
बुलंदी के मस्त,ताब तेवर
शतरंजी चाल चलकर ...फिर हंसे सत्त पर सवार होकर ..फिर हंसे एक होने के चाल पे,डोलकर राजा जी, सर से नख तक जाल बुनकर ..फिर हंसे। घुम घाम कर वही...
-
कई दिनों बाद ...थोड़ी सी सुकून और कलम...गानें के साथ हालत ये मेरे मन की, जाने ना जाने कोई आई हैं आते आते होठों पे दिल की बातें. . क्योंकि ...
-
तुम चुप थीं उस दिन.. पर वो आँखों में क्या था...? जो तनहा, नहीं सरगोशियाँ थीं, कई मंजरो की, तमाम गुजरे, पलों के...
-
💮💮 मौन है गर्जन है रत है विरक्त है शून्य है.. शब्द है पर खामोश है नत है .. हर ऊषा की प्रत्युषा ...

शहीद जवानों को देश विनम्र श्रद्धा सुमन अर्पित करता है |साथ ही पाक के आतंकियों सहित सहयोगियों को सबक सिखाने की सलाह सरकार से निवेदन निवेदित है
ReplyDeleteजी,सही
Deleteआभार
🇮🇳💐🙏😥
ReplyDelete🙏
Deleteबहुत उम्दा।
ReplyDeleteआभार
Deleteशत् शत् नमन 🙏
ReplyDeleteनमन
Deleteमुनासिब फैंसले की घडी है ...
ReplyDeleteसच में अब तो वक्त ही गया है ... कहीं न कहीं पार होना चाहिए ...
नमन है मेरा सैनिकों को ...
नमन
Deleteबंद करो वाइज़ शोर को.....यही तो मुसीबत हो। कम शब्दों में सारी बात कह दी। आपको बधाई। सैनिकों को नमन। अभिनंदन का वंदन।
ReplyDeleteआभार
ReplyDeleteमुनासिब फैसले की घड़ी हैं।
ReplyDeleteउम्दा सृजन , वीर सैनिकों को नमन
सादर नमन
ReplyDelete