Sep 25, 2018

स्त्री विशेष कहानी




"बिखरते पलछिन", को प्रतिलिपि पर पढ़ें : https://hindi.pratilipi.com/story/x4ywR76Oj5iv?utm_source=android&utm_campaign=content_share भारतीय भाषाओँ में अनगिनत रचनाएं पढ़ें, लिखें और दोस्तों से साझा करें, पूर्णत: नि:शुल्क

No comments:

Post a Comment

बुलंदी के मस्त,ताब तेवर

  शतरंजी चाल चलकर ...फिर हंसे सत्त पर सवार होकर ..फिर हंसे एक होने के चाल पे,डोलकर राजा जी, सर से नख तक जाल बुनकर ..फिर हंसे। घुम घाम कर वही...