Apr 5, 2020

एक दीप देश के नाम..




दीये जलाकर हमने आशाओं की लौ जलाई है
जिंदगी से जंग लड़ने की कसम सभी ने खाई है
ये दीप प्रज्वलन  सिर्फ़ दिये की बातीं ही नहीं
एक संकल्प संग उम्मीद की अलख जगाई है।
पम्मी सिंह ‘तृप्ति’...✍

4 comments:

  1. ये आशाओं के दीप ही दूर तक जाते हैं आशा प्रजव्लित रखते हैं मन में ...
    भावपूर्ण ...

    ReplyDelete
  2. ये दीप प्रज्वलन सिर्फ़ दिये की बातीं ही नहीं
    एक संकल्प संग उम्मीद की अलख जगाई है।...दीये की ज्योति के दिव्य दर्शन को दीपदीपाती प्रेरक पंक्तियाँ। विलक्षण विचार। आभार और बधाई।

    ReplyDelete

रेत सी जिंदगी..

  रेत सी जिंदगी.. हमें .. बड़ा वहम हो चला था कि गांठे खुल गई  भला ये कैसी सोच ? मन की गांठ और .. फितरत खुलने की ना ना ना इल्म ही नहीं रहा उन...