Dec 20, 2019

सायली





चित्राभिव्यक्ति रचना

सायली छंद

मासूम
निगहबान नजर
बढाती उम्मीदें, ख्वाहिशें
सीचती मेरी
जमीन।
पम्मी सिंह 'तृप्ति'

2.
जख्म
वजह बनी
प्रेरित करती आत्मशक्ति,
सुलझती रही
उलझनें।

4 comments:

  1. वाह ...
    सयाली छंद में लिखी रचनाएं लाजवाब हैं आपकी ...
    बहुत खूब ...

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  2. शुभेच्छा संपन्न प्रतिक्रिया हेतु आभार।

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  3. लाजवाब !! बहुत सुंदर आदरणीया ।

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  4. दोनों छोटी कविताएँ दिल को छू जाती हैं। पहली में वो मासूम नज़र है, जो हमें बिना कुछ कहे हिम्मत दे देती है। जैसे कोई अपना हमें देखकर कह दे, “तुम कर लोगे।” ये बहुत सच्चा एहसास है। दूसरी कविता भी ज़िंदगी की हक़ीक़त बताती है। कई बार चोट लगने से हम टूटते नहीं, बल्कि और मज़बूत हो जाते हैं।

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