Apr 30, 2016

रीवाज पाल रखी..

लोगो ने ये कौन सी

ऱीवाज पाल रखी

जहाँ खुद की

पाकीजगी साबित

करने की चाह में

दुसरो को गिराना पडा,

मसाइबो की क्या कमी

खुद की रयाजत और

उसके समर की है आस..

रफाकते भी चंद दिनो की

पर मुजमहिल इस कदर कि

मैं ही मैं हूँ।

न जाने

वो इख्लास की

छवि गई कहाँ

जहाँ अजीजो की

भी थी हदें

खुदी की जरकाऱ

साबित करने की चाह में

लोगो ने ये कौन सी

रीवाज पाल रखी है

इक हकीकत ऐसी

जिससे नजरे भी

बचती और बचाती है...।
                     ©..पम्मी



16 comments:

  1. अति सुंदर रचना

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  2. प्रतिक्रिया हेतु आभार..

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  3. प्रतिक्रिया हेतु आभार,सर

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  4. एक अच्छी रचना। सच है अपनी पवित्रता दिखाने के लिए औरों को बुरा बताना आज कल रिवाज हो गया है। मुझे अच्छी लगी रचना।

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  5. बहुत ही सुंदर रचना। सच में हम सभी ने ही कुछ घातक रिवाज पाल रखे हैं। बहुत ही अच्छा लिखा है आपने।

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  6. सुन्दर शब्दों को सजाकर बनायीं गयी एक बहुत ही सुन्दर रचना

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  7. आज का कटु सत्य...बहुत सुन्दर रचना

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  8. प्रतिक्रिया हेतु आभार, सर

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  9. बहुत सुन्दर रचना।

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  10. शुक्रिया,
    उत्साह वर्धन के लिए धन्यवाद।

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