अनभिज्ञ हूँ काल से सम्बन्धित सारर्गभित बातों से , शिराज़ा है अंतस भावों और अहसासों का, कुछ ख्यालों और कल्पनाओं से राब्ता बनाए रखती हूँ जिसे शब्दों द्वारा काव्य रुप में ढालने की कोशिश....
Jan 31, 2016
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चन्द किताबें तो कहतीं हैं..
दिल्ली प्रेस से प्रकाशित पत्रिका सरिता (फरवरी प्रथम) में छपी मेरी लेख "सरकार थोप रही मोबाइल "पढें। सरिता का पहला संस्करण 1945 में ...

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डायरी 20/जून 24 इधर कई दिनों से बहुत गर्मी आज उमस हो रही। कभी कभार बादल पूरे आसमान को ढके हुए। 'सब ठीक है' के भीतर उम्मीद तो जताई...
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कहने को तो ये जीवन कितना सादा है, कितना सहज, कितना खूबसूरत असबाब और हम न जाने किन चीजों में उलझे रहते है. हाल चाल जानने के लिए किसी ने पू...
छोटी किंतु दमदार और सार्थक रचना की प्रस्तुति। अच्छे लेखन के लिए शुभकामनाएं।
ReplyDeleteछोटी किंतु दमदार और सार्थक रचना की प्रस्तुति। अच्छे लेखन के लिए शुभकामनाएं।
ReplyDeleteप्रतिक्रिया हेतू आभार, सर धन्यवाद.
ReplyDeleteउम्दा रचना ।
ReplyDeleteआपके ब्लॉग को यहाँ शामिल किया गया है ।
ब्लॉग"दीप"
यहाँ भी पधारें-
"कवि की दशा (हास्य कविता)"
बहुत बहुत धन्यवाद,सर
ReplyDeleteबहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति..
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