अनभिज्ञ हूँ काल से सम्बन्धित सारर्गभित बातों से , शिराज़ा है अंतस भावों और अहसासों का, कुछ ख्यालों और कल्पनाओं से राब्ता बनाए रखती हूँ जिसे शब्दों द्वारा काव्य रुप में ढालने की कोशिश....
छोटी किंतु दमदार और सार्थक रचना की प्रस्तुति। अच्छे लेखन के लिए शुभकामनाएं।
प्रतिक्रिया हेतू आभार, सर धन्यवाद.
उम्दा रचना ।आपके ब्लॉग को यहाँ शामिल किया गया है ।ब्लॉग"दीप"यहाँ भी पधारें-"कवि की दशा (हास्य कविता)"
बहुत बहुत धन्यवाद,सर
बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति..
शतरंजी चाल चलकर ...फिर हंसे सत्त पर सवार होकर ..फिर हंसे एक होने के चाल पे,डोलकर राजा जी, सर से नख तक जाल बुनकर ..फिर हंसे। घुम घाम कर वही...
छोटी किंतु दमदार और सार्थक रचना की प्रस्तुति। अच्छे लेखन के लिए शुभकामनाएं।
ReplyDeleteछोटी किंतु दमदार और सार्थक रचना की प्रस्तुति। अच्छे लेखन के लिए शुभकामनाएं।
ReplyDeleteप्रतिक्रिया हेतू आभार, सर धन्यवाद.
ReplyDeleteउम्दा रचना ।
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"कवि की दशा (हास्य कविता)"
बहुत बहुत धन्यवाद,सर
ReplyDeleteबहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति..
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