Aug 18, 2025

लेखकीय रूप

  अच्छा लगता है जब विशिष्ट समकालीन संदर्भ और तुर्शी के साथ जीवन,समाज के पहलूओं  को उजागर करतीं

लेख छपती है। इस सफ़र का हिस्सा आप भी बनिए,पत्रिकाओ को हमसफ़र बनाए व
" राजनीति में धर्मकर्म " मोहरा बनती आम आदमी, दिल्ली प्रेस से प्रकाशित  सामाजिक ,राजनीतिक पत्रिका " सरिता " जुलाई (द्वितीय) 2025 में पढे





रेत सी जिंदगी..

  रेत सी जिंदगी.. हमें .. बड़ा वहम हो चला था कि गांठे खुल गई  भला ये कैसी सोच ? मन की गांठ और .. फितरत खुलने की ना ना ना इल्म ही नहीं रहा उन...