Mar 11, 2025

चन्द किताबें तो कहतीं हैं..



दिल्ली प्रेस से प्रकाशित पत्रिका सरिता (फरवरी प्रथम)

में छपी मेरी लेख "सरकार थोप रही मोबाइल "पढें।

सरिता का पहला संस्करण 1945 में प्रकाशित हुआ था।यह पत्रिका सामाजिक,राजनीतिक और पारिवारिक पुनर्निर्माण की विचारधारा पर आधारित है।

(पत्रिका blinkit ,Instamart पर  hai,digital subscription available है।)

https://www.sarita.in/society/smartphones-government-is-imposing-mobiles




बुलंदी के मस्त,ताब तेवर

  शतरंजी चाल चलकर ...फिर हंसे सत्त पर सवार होकर ..फिर हंसे एक होने के चाल पे,डोलकर राजा जी, सर से नख तक जाल बुनकर ..फिर हंसे। घुम घाम कर वही...