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Feb 7, 2018

सुर्ख रंग बदलते नहीं..







जब..
छट जाएगी हर धुंध


आसमान की नीली क़बा पे

दिखेगें इन्द्रधनुषी रंग

बसारत कई खुश रंग की,

बसीरत की रंगों से

कहीं धूप , कहीं छांव है,

भागती जिंदगी की दोड़ में

क़ुर्बतों में  भी सुर्ख रंग बदलते नहीं

ताब है कई रंगों की 

हुनर है ,
संगतराशी की तो..

तुम एक इन्द्रधनुषी ख्वाब तो देखों,

ज़हन के कैनवास पे फिर

इक नई कलेवर  में निखर  ,

आज वो उम्मीद फिर मुस्कराता है ...
                                     पम्मी सिंह


बसारत- sight
बसीरत- Insightदूरदर्शिता

क़बा-चादर  apparel,garment
कुर्बत- नजदीक nearness, vicinity

28 comments:

  1. बहुत सुंदर रचना
    खूबसूरत शब्दों से सजी

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    1. सदैव ही प्रोत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद।

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  2. वाह!!बहुत खूब!!

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    1. सदैव ही प्रोत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए आभार।

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  3. वाह बहुत खूब।
    धुंध है छट ही जायेगी
    ख्वाब जरूर सच होंगे
    शर्त ये है कि ख्वाब देख तो सही।
    वाह वाह पम्मी जी।

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    1. काव्य को विस्तार देती प्रतिक्रिया के लिए बहुत बहुत धन्यवाद।

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  4. जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार ९फरवरी २०१८ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं...धन्यवाद।

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  5. Replies
    1. प्रोत्साहित करती प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद।

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  6. बहुत ही सुन्दर...
    वाह!!!

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    1. सदैव ही प्रोत्साहित करती प्रतिक्रिया हेतु धन्यवाद।

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  7. आदरणीय / आदरणीया आपके द्वारा 'सृजित' रचना ''लोकतंत्र'' संवाद मंच पर 'सोमवार' १२ फरवरी २०१८ को साप्ताहिक 'सोमवारीय' अंक में लिंक की गई है। आप सादर आमंत्रित हैं। धन्यवाद "एकलव्य" https://loktantrasanvad.blogspot.in/

    टीपें : अब "लोकतंत्र" संवाद मंच प्रत्येक 'सोमवार, सप्ताहभर की श्रेष्ठ रचनाओं के साथ आप सभी के समक्ष उपस्थित होगा। रचनाओं के लिंक्स सप्ताहभर मुख्य पृष्ठ पर वाचन हेतु उपलब्ध रहेंगे।

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  8. आदरणीय पम्मी दी , आप की रचनाएं इतनी गहरी होती हैं कि उन तक पंहुचाना बहुत कठिन होता है । मैं आपके लेखन की मुरीद हूँ ।
    बेहद उम्दा रचना ।
    सादर

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    1. शुभेच्छा सम्पन्न प्रतिक्रिया‎ हेतु हृदयतल से आभार 

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  10. बेहद खूबसूरत रचना .

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    1. शुभेच्छा सम्पन्न प्रतिक्रिया‎ हेतु आभार ।

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  11. वाह बहुत सुंदर

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    1. शुभेच्छा सम्पन्न प्रतिक्रिया‎ हेतु आभार.. 

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  12. ताब है कई रंगों की

    हुनर है ,संगतराशी की तो..

    तुम एक इन्द्रधनुषी ख्वाब तो देखों,....... वाह , बहुत खूब!!!!

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    1. शुभेच्छा सम्पन्न प्रतिक्रिया‎ हेतु से आभार।

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  13. ज़हन के केनवास पर इंद्रधानुशी ख़्वाब जब सजता है कायनात सतरंगी जो जाती है ...
    गहरी नजम ...

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    1. जी,धन्यवाद।

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  14. वाह ! आशावाद से ओतप्रोत रचना ! खूबसूरत !! बहुत खूब आदरणीया ।

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